
आफरीन आफरीन, आफरीन आफरीन
आँखें देखी तो मैं देखता रह गया
जाम दो और दोनों ही दो-आतिशां
आँखें या मैकदे के ये दो बाब हैं
आँखें इनको कहूँ या कहूँ ख्वाब हैं
आँखें नीची हुईं तो हया बन गईं
आँखें ऊँची हुईं तो दुआ बन गईं
आँखें उठ कर झुकیں तो अदा बन गईं
आँखें झुक कर उठیں तो क़ज़ा बन गईं
आँखें जिनमें हैं कैद आस्माँ-ओ-ज़मीन
नरगिसी, सुरमयी
आफरीन आफरीन, आफरीन आफरीन


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